भारत और अमेरिका के बीच इस समय टैरिफ और व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। इसी बीच सूत्रों से एक अहम जानकारी सामने आई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने, यानी सितंबर 2025 में अमेरिका का दौरा कर सकते हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक में हिस्सा लेना होगा।
UNGA में होगा मुख्य भाषण
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी सितंबर में न्यूयॉर्क में होने वाली UNGA की उच्च-स्तरीय बैठक में भाग लेंगे। यह बैठक 23 से 27 सितंबर तक चलेगी और अंतिम दिन की कार्यवाही 29 सितंबर 2025 को होगी।
भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के 15 मिनट के भाषण के लिए 26 सितंबर की सुबह का समय तय किया है। वहीं, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भाषण 23 सितंबर को होगा।
द्विपक्षीय मुलाकातें भी होंगी
इस दौरे के दौरान पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी होने की संभावना है। चर्चा में व्यापार, टैरिफ विवाद और रक्षा सहयोग जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि दोनों नेता इन मुद्दों पर समझौते की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
ज़ेलेंस्की से मुलाकात तय
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात की। इसके बाद उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं की मुलाकात पर सहमति बन गई है। यह बैठक भी अमेरिका में होने की संभावना है और इसमें रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
दौरे का महत्व
- वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका: UNGA में पीएम मोदी का भाषण भारत की विदेश नीति और वैश्विक दृष्टिकोण को स्पष्ट करेगा।
- व्यापार विवाद सुलझाने का मौका: अमेरिका के साथ टैरिफ और व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
- रणनीतिक साझेदारी: रक्षा, तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में नए सहयोग की संभावना।
- अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करना: ज़ेलेंस्की और ट्रंप जैसे नेताओं से मुलाकात भारत के कूटनीतिक दायरे को और व्यापक करेगी।
संभावित एजेंडा
- व्यापार और टैरिफ पर समझौते की दिशा में बातचीत।
- रक्षा और सुरक्षा में सहयोग बढ़ाना।
- जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के मुद्दों पर वैश्विक सहयोग।
- शांति और स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय पहल।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा न केवल UNGA में भारत की आवाज को बुलंद करेगा, बल्कि अमेरिका और अन्य देशों के साथ संबंधों को भी नई दिशा देगा। व्यापार विवादों और वैश्विक चुनौतियों के बीच यह यात्रा भारत की विदेश नीति के लिए एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।
