पंजाब सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा घोषित प्रस्तावित कानून के अनुसार अब राज्य के निजी स्कूल सालाना 5% से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। साथ ही, जिन स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों में तय सीमा से अधिक फीस वसूली है, उन्हें अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस (रिफंड) करनी होगी।
इस फैसले से पंजाब के लगभग 7,800 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 32 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य शिक्षा के व्यवसायीकरण पर रोक लगाना, स्कूलों की जवाबदेही तय करना और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करना है।
शिक्षा गुणवत्ता में पंजाब बना देश का अग्रणी राज्य
फीस नियंत्रण के इस फैसले के साथ-साथ पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान बना रहा है। नीति आयोग की एजुकेशन क्वालिटी रिपोर्ट में पंजाब ने बुनियादी शिक्षा के प्रमुख मानकों पर केरल जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। वहीं, केंद्र सरकार के परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 में ‘लर्निंग आउटकम्स एंड क्वालिटी’ श्रेणी में पंजाब ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।
शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर
राज्य सरकार ने शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं।
* सिंगापुर में 8 बैचों के माध्यम से 264 शिक्षा अधिकारियों, प्रिंसिपलों और शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया।
* फिनलैंड की तुर्कू यूनिवर्सिटी में 288 प्राथमिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया।
* IIM अहमदाबाद में 243 हेडमास्टरों ने लीडरशिप ट्रेनिंग प्राप्त की।
सरकारी स्कूलों का व्यापक कायाकल्प
पंजाब सरकार शिक्षा सुधारों के दूसरे चरण में 3,500 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। राज्य में अब तक 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए जा चुके हैं। सरकारी स्कूलों में 99.9% बिजली, 99% कंप्यूटर सुविधा और 80% से अधिक स्मार्ट क्लासरूम उपलब्ध हैं। सैकड़ों नए क्लासरूम, साइंस लैब, कंप्यूटर
लैब, मल्टी-पर्पज रूम, खेल मैदान और अलग-अलग शौचालय बनाए गए हैं। छात्रों को समय पर मुफ्त यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तकें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
छात्रों की उपलब्धियों में लगातार बढ़ोतरी
सरकारी स्कूलों के परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। कक्षा 10वीं के 90% से अधिक छात्र अब 11वीं कक्षा में प्रवेश ले रहे हैं। वहीं, जेईई एडवांस 2026 में पंजाब के सरकारी स्कूलों के 64 छात्रों ने सफलता हासिल की, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 44 थी।
किताबों की आपूर्ति में भी बड़ा बदलाव
शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सभी निजी स्कूलों के कक्षा 1 से 12वीं तक के छात्रों को बोर्ड स्वयं सीधे पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराएगा। सरकार का मानना है कि इससे किताबों की कीमतों में पारदर्शिता आएगी, अभिभावकों का खर्च कम होगा और छात्रों को समय पर पुस्तकें मिल सकेंगी।
पंजाब सरकार का कहना है कि फीस नियंत्रण, शिक्षा गुणवत्ता में सुधार, आधुनिक स्कूल ढांचा और पारदर्शी व्यवस्था जैसे कदम मिलकर राज्य में ‘पंजाब शिक्षा क्रांति’ को नई दिशा दे रहे हैं।
