भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है और शुक्रवार को यह फिर एक नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे टूटकर 90.56 पर बंद हुआ। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब शेयर बाजार में मजबूती देखने को मिल रही है।
डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में रुपया
गुरुवार को भी रुपया 38 पैसे लुढ़ककर 90.32 पर बंद हुआ था।
शुक्रवार को बाजार खुलते ही रुपया 90.43 पर खुला, लेकिन जल्दी ही फिसलकर 90.56 पर पहुंच गया।
इस बीच, वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 98.37 पर पहुंच गया है, जो डॉलर को और मज़बूत दर्शाता है।
साथ ही ब्रेंट क्रूड ऑयल 0.67% बढ़कर 61.69 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
शेयर बाजार में तेजी, लेकिन रुपये में गिरावट जारी
रुपये की कमजोरी के बावजूद घरेलू शेयर बाजार में मजबूती देखने को मिली:
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सेंसेक्स 400 अंक ऊपर जाकर 85,215 पर
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निफ्टी 118 अंक बढ़कर 26,000 के पार
बाजार का यह उछाल रुपये की लगातार गिरावट को थाम नहीं सका।
हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली अब भी जारी है और यह रुपया पर दबाव का बड़ा कारण बनी हुई है। गुरुवार को एफआईआई ने 2,020.94 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
क्यों टूट रहा है रुपया? बड़े कारण सामने आए
1. भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर अनिश्चितता
भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील अभी भी अटकी हुई है।
हालांकि यह अंतिम चरण में बताया जा रहा है, लेकिन कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है।
इससे बाज़ार में सतर्कता बनी हुई है और निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।
2. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
दिसंबर में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 22,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की है।
इतनी बड़ी निकासी से रुपये पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।
जब विदेशी डॉलर लेकर बाहर जाते हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता जाता है।
3. आयातकों द्वारा डॉलर की ज्यादा खरीद
ग्लोबल बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में उछाल आया है।
इससे आयातकों को ज्यादा डॉलर खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे रुपये की गिरावट और तेज हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक
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ट्रेड डील पर स्पष्टता नहीं आती,
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विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं रुकती
तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
