दुनिया की सबसे चर्चित इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला इस समय बड़े संकट से गुजर रही है। अमेरिका—जो इसका सबसे बड़ा बाज़ार है—वहीं इसकी बिक्री तेज़ी से गिरकर चार साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। नवंबर 2024 में कंपनी की बिक्री लगभग 23% घटकर 39,800 यूनिट रह गई। यह जनवरी 2022 के बाद सबसे कम आंकड़ा है।
यह गिरावट तब दर्ज हुई जब कंपनी ने अपने लोकप्रिय मॉडल Model Y और Model 3 के सस्ते वेरिएंट लॉन्च किए थे। इसके बावजूद टेस्ला बिक्री में सुधार नहीं ला सकी।
सस्ते मॉडल भी नहीं बचा पाए गिरावट
टेस्ला ने उम्मीद जताई थी कि करीब 5,000 डॉलर सस्ते स्टैंडर्ड वेरिएंट टैक्स क्रेडिट खत्म होने के बाद मांग को संभालेंगे।
लेकिन अमेरिका में ट्रंप सरकार द्वारा 7,500 डॉलर के फेडरल टैक्स क्रेडिट समाप्त किए जाने के बाद पूरा ईवी मार्केट सुस्त पड़ गया।
नतीजा यह हुआ कि:
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सस्ते मॉडल की मांग उम्मीद के मुकाबले कम रही
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इनके आने से महंगे मॉडल की बिक्री पर भी असर पड़ा
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खासकर Model 3 की बिक्री में गिरावट ज़्यादा दिखी
यह स्थिति इसलिए और गंभीर है क्योंकि कंपनी आने वाले समय में रोबोटैक्सी और ह्यूमनॉइड रोबोट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर दांव लगा रही है, जिनके लिए मजबूत कैश फ्लो की जरूरत होती है।
भारत में भी टेस्ला की एंट्री धीमी
भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाज़ार में भी टेस्ला को वह सफलता नहीं मिल सकी जिसकी उम्मीद थी।
कंपनी ने सितंबर में आधिकारिक रूप से भारत में कदम रखा था, लेकिन शुरुआती बिक्री बेहद निराशाजनक रही।
सरकारी रिकॉर्ड्स के अनुसार:
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सितंबर से नवंबर तक सिर्फ 157 यूनिट टेस्ला कारें बिकीं
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नवंबर में बिक्री मात्र 48 यूनिट रही
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तुलना में BMW ने 267 इलेक्ट्रिक कारें बेचीं
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Mercedes-Benz भी प्रीमियम ईवी सेगमेंट में मज़बूत बनी हुई है
भारत में टेस्ला की धीमी शुरुआत का कारण यहां की कीमतें, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रीमियम ईवी क्षेत्र में मौजूद पहले से मजबूत ब्रांड हो सकते हैं।
कंपनी की भविष्य की रणनीति पर सवाल
अमेरिका में बिक्री गिरना और भारत में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाना टेस्ला की वैश्विक रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
ईवी मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, टैक्स क्रेडिट में कटौती और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताएँ टेस्ला के लिए नई चुनौतियाँ बन गई हैं।
