पंजाब को नशा मुक्त बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ‘ड्रग्स के खिलाफ जंग’ अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत की। यह कार्यक्रम जालंधर से शुरू किया गया, जबकि इसका मुख्य आयोजन फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हुआ।
मुख्यमंत्री का संदेश: गुस्से से नहीं, लहर से जीत
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संबोधन में कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई गुस्से या डर से नहीं, बल्कि जन आंदोलन की तरह लहर बनाकर जीती जाएगी। उन्होंने कहा कि पंजाबी जब किसी बुराई को खत्म करने का संकल्प लेते हैं, तो उसे जड़ से खत्म करके ही दम लेते हैं। हर वह कदम, जो पंजाब को नशे से बचाने के लिए उठाया जा रहा है, गर्व की बात है।
पुलिस नहीं, जनता का सहयोग जरूरी
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि इस लड़ाई में सिर्फ पुलिस की सख्ती काफी नहीं है, बल्कि लोगों का सहयोग सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि समाज जब खुद आगे आता है, तभी स्थायी बदलाव संभव होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नशे के खिलाफ खुलकर आवाज उठाएं।
पंजाब को बदनाम करने पर नाराजगी
भगवंत मान ने कहा कि हर कोई पंजाब को नशे के नाम पर बदनाम करता है, जबकि सच्चाई यह है कि ड्रग्स की समस्या हर राज्य में है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दूसरे राज्यों में भी बड़ी मात्रा में नशा पकड़ा गया है, लेकिन बदनामी सिर्फ पंजाब की होती है।
सीमा सुरक्षा और एंटी-ड्रोन सिस्टम
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पंजाब सरकार ने अपने संसाधनों से एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदे हैं, ताकि सीमा पार से आने वाले नशे को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र से मदद का इंतजार करने के बजाय राज्य सरकार ने खुद पहल की है।
दूसरे चरण की विस्तृत योजना
इस मौके पर स्पेशल डीजीपी लॉ एंड ऑर्डर अर्पित शुक्ला ने अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में पूरे पंजाब में 19,500 वार्ड स्तर की कमेटियां बनाई गई हैं, जिनमें करीब 50,000 सदस्य शामिल हैं। ये कमेटियां पंजाब पुलिस और सरकार के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
पहले चरण की बड़ी उपलब्धियां
अर्पित शुक्ला ने बताया कि पहले चरण के दौरान 55,000 से ज्यादा जनसभाएं और बैठकें की गईं। इस दौरान करीब 30,000 एनडीपीएस केस दर्ज हुए और 358 बड़े ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इससे नशे की सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ा।
युवाओं की वापसी नई जिंदगी की ओर
सबसे बड़ी सफलता बताते हुए उन्होंने कहा कि करीब 90,000 युवाओं ने नशा छोड़कर नई जिंदगी की शुरुआत की है। यह दिखाता है कि यह अभियान सिर्फ कानून की कार्रवाई नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में बढ़ता कदम है।
