अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की संभावित मौद्रिक नीति और डॉलर की मज़बूती के चलते भारतीय इक्विटी बाजार पर दबाव देखने को मिला। वहीं, टैरिफ और व्यापारिक सौदों को लेकर वैश्विक स्तर पर बने तनाव ने भी निवेशकों की चिंता को बढ़ाया। शुक्रवार को अगस्त के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स 585.67 अंक यानी 0.72% गिरकर 80,599.91 के स्तर पर बंद हुआ।
सेंसेक्स में भारी गिरावट, केवल 6 स्टॉक्स रहे हरे निशान में
सेंसेक्स के 30 में से केवल 6 स्टॉक्स ही हरे निशान में बंद हो सके, जबकि 24 स्टॉक्स में गिरावट दर्ज की गई। सन फार्मा के शेयर में 4.43% की गिरावट रही। टाटा स्टील, इन्फोसिस (INFY) और मारुति के शेयरों में भी 2% से 3% तक की गिरावट देखी गई। दूसरी ओर, ट्रेंट के शेयर 3.23% और एशियन पेंट्स के 1.30% की बढ़त के साथ बंद हुए।
निफ्टी ने भी दिखाया कमजोरी का संकेत
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 203 अंक यानी 0.82% गिरकर 24,565.35 पर बंद हुआ। निफ्टी के 50 में से 37 स्टॉक्स में गिरावट और 13 में तेजी रही। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो फार्मा 2.75%, हेल्थकेयर 2.33% और मेटल इंडेक्स 1% की गिरावट में बंद हुए। ऑटो, IT और मेटल सेक्टर भी दबाव में रहे। हालांकि FMCG इंडेक्स ने 1.39% की बढ़त दर्ज की।
एशियाई बाजारों में भी रही कमजोरी
वैश्विक संकेत भी कमजोर रहे। जापान का निक्केई इंडेक्स 0.38% गिरकर 40,914.66 पर बंद हुआ, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 2.94% टूटकर 3,150 पर आ गया। हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.21% गिरकर 24,720 और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.19% टूटकर 3,566 के स्तर पर बंद हुआ।
अमेरिकी बाजारों से भी नहीं मिला समर्थन
31 जुलाई को अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। डाउ जोन्स 0.74% टूटकर 44,131 पर, नैस्डैक कंपोजिट 0.034% गिरकर 21,122 पर और S&P 500 इंडेक्स 0.37% गिरकर 6,339 पर बंद हुआ।
विदेशी निवेशकों ने जुलाई में जमकर की बिकवाली
जुलाई महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने कुल 47,666.68 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। केवल 31 जुलाई को ही FIIs ने 5,588.91 करोड़ रुपये की बिकवाली की। इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस दिन 6,372.71 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। पूरे जुलाई में DIIs की कुल शुद्ध खरीदारी 60,939.16 करोड़ रुपये रही।
जून में दिखा था निवेश का सकारात्मक रुख
इसके मुकाबले जून महीने में FIIs ने 7,488.98 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी, जबकि DIIs की खरीदारी 72,673.91 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। यह दर्शाता है कि जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी।
31 जुलाई को भी बाजार रहा था कमजोर
बीते गुरुवार, यानी 31 जुलाई को भी बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 296 अंक गिरकर 81,186 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 87 अंकों की गिरावट के साथ 24,768 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में बाजार ने भारी उतार-चढ़ाव देखा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 700 अंक गिरा, फिर 1000 अंकों की रिकवरी भी हुई।
सेक्टोरल प्रदर्शन रहा मिलाजुला
एनएसई के मेटल, फार्मा और ऑयल एंड गैस सूचकांक गिरावट में रहे, जबकि एफएमसीजी इंडेक्स ने 1.44% की बढ़त के साथ कारोबारी दिन समाप्त किया।
निवेशकों को सलाह
बाजार में फिलहाल वैश्विक संकेतों और फंड फ्लो पर नजर रखना ज़रूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी फेड नीति बैठक, डॉलर की चाल और कॉर्पोरेट नतीजे निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करेंगे।
