भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार 16 जुलाई 2026 को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद लगभग सपाट समापन हुआ। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1.44 अंक यानी करीब 0.0019% की मामूली बढ़त के साथ 77,186.87 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 5.75 अंक की हल्की गिरावट के साथ 24,072.75 पर बंद हुआ। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में खरीदारी और बिकवाली के बीच संतुलन बना रहा।
शुरुआती तेजी आखिर तक नहीं टिक सकी
कारोबार की शुरुआत सकारात्मक माहौल में हुई थी और सेंसेक्स शुरुआती घंटों में अच्छी बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। हालांकि, दोपहर बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार की शुरुआती बढ़त धीरे-धीरे कम हो गई। दिन के अंत तक सेंसेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी हल्की गिरावट में रहा।
वैश्विक संकेतों का दिखा असर
बाजार पर वैश्विक परिस्थितियों का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और एशियाई बाजारों की कमजोर चाल के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। इन कारणों से बाजार में बड़े निवेश से बचने का माहौल बना रहा और कारोबार सीमित दायरे में होता रहा।
आईटी शेयरों ने दिया सहारा, बैंकिंग शेयरों में दबाव
गुरुवार के कारोबार में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ समर्थन मिला। दूसरी ओर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कई शेयरों में कमजोरी रही, जिसके कारण बाजार की बढ़त सीमित रह गई। विश्लेषकों का मानना है कि सेक्टर आधारित कारोबार के चलते प्रमुख सूचकांक बड़ी तेजी दर्ज नहीं कर सके।
निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के नतीजों पर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर रहेगी। यदि वैश्विक माहौल स्थिर रहता है और कॉर्पोरेट नतीजे उम्मीद के अनुरूप आते हैं, तो बाजार में फिर से सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है। वहीं किसी भी बड़ी वैश्विक घटना का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है।
सतर्कता के बीच जारी रहा कारोबार
गुरुवार का कारोबार यह संकेत देता है कि फिलहाल निवेशक बड़े फैसले लेने से पहले वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन अंत में सेंसेक्स का हरे निशान में बंद होना यह दर्शाता है कि निवेशकों का भरोसा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
