बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद अंत में बाजार भारी नुकसान के साथ बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 1,300 अंकों से अधिक गिरकर 76,863.71 पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी करीब 394 अंक गिरकर 23,866.85 पर बंद हुआ। बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों को बड़ा झटका लगा।
सुबह से ही दबाव में रहा बाजार
बुधवार सुबह जब बाजार खुला तो शुरुआत से ही कमजोरी दिखाई दी। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में चले गए। दिनभर बाजार में रिकवरी की कोशिश जरूर हुई, लेकिन बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि बाजार संभल नहीं सका। बैंकिंग, आईटी, ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर के कई बड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
वैश्विक कारणों का पड़ा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय हालात को लेकर निवेशकों में चिंता देखी गई। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत बनी। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो भारत जैसे आयात पर निर्भर देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी रही। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने कई सेक्टरों में अपने शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में पैसे निकालते हैं तो बाजार में गिरावट देखने को मिलती है।
निवेशकों की बढ़ी चिंता
आज की गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। कई कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि जब वैश्विक परिस्थितियां अस्थिर रहती हैं, तो निवेशक सावधानी बरतते हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है।
आगे क्या रह सकता है रुख
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाओं और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। अगर अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य रहती है और विदेशी निवेशकों की खरीदारी बढ़ती है, तो बाजार में फिर से मजबूती देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों को धैर्य और समझदारी के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
