विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हाल ही में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में शुगर (डायबिटीज) जैसी बीमारियां तेज़ी से बढ़ रही हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2025 तक देश में 7 करोड़ से ज़्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हो सकते हैं, जिससे भारत “डायबिटीज की राजधानी” बनने की ओर बढ़ रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि देश में होने वाली ज्यादातर मौतें दिल की बीमारियों से जुड़ी हैं। पिछले 30 सालों में भारत में हृदय रोगियों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है।
दिल की बीमारी बनी सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती
तीन दशक पहले दिल की बीमारियां भारत में मृत्यु का पांचवां प्रमुख कारण थीं, लेकिन अब यह पहला स्थान ले चुकी हैं।
एक अध्ययन में सामने आया है कि 1990 के बाद से दिल, स्ट्रोक, शुगर और COPD (फेफड़ों की बीमारी) जैसी गैर-संचारी बीमारियों ने लोगों की सेहत को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है।
WHO रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अब 58% रोगभार (Disease Burden) गैर-संचारी बीमारियों का है, जबकि 1990 में यह सिर्फ 29% था।
इलाज महंगा और आम आदमी की पहुंच से दूर
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में 70% ओपीडी सेवाएं, 58% भर्ती मरीज़, और 90% दवाइयां व टेस्ट निजी क्षेत्र के पास हैं।
इसका मतलब है कि गुणवत्तापूर्ण इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति और भी चिंताजनक है — सरकारी अस्पतालों में दिल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है।
ग़रीब और मध्यमवर्गीय लोग निजी अस्पतालों के महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा पाते, जिसके कारण कई मरीज समय पर इलाज न मिलने से अपनी जान गंवा देते हैं।
बढ़ रहा है ब्लड प्रेशर और मोटापे का खतरा
अध्ययन के अनुसार, भारत में 11.4% लोग डायबिटीज और 36% लोग हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, जबकि 15.3% लोग प्री-डायबिटिक हैं — यानी उन्हें भविष्य में डायबिटीज का खतरा है।
पंजाब में हाई ब्लड प्रेशर के मरीज सबसे ज़्यादा (51.8%) हैं।
वहीं, गोवा में शुगर के मामले सबसे अधिक (26.4%) और उत्तर प्रदेश में सबसे कम (4.8%) हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि गलत खान-पान, कम शारीरिक गतिविधि और तनाव इस बढ़ती बीमारी के मुख्य कारण हैं।
दिल का दौरा बन रहा है आम और खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अमनप्रीत सिंह का कहना है कि दिल का दौरा (Heart Attack) अब एक आम लेकिन जानलेवा स्थिति बन चुका है।
उनके मुताबिक, छाती में दर्द, सांस लेने में तकलीफ और थकान इसके शुरुआती संकेत हैं। समय पर जांच और इलाज से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
सरकार को उठाने होंगे ठोस कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने, ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति करने, और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाने की ज़रूरत है।
अगर अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में भारत के सामने एक स्वास्थ्य आपदा खड़ी हो सकती है।
