ब्यूरो, लखनऊ: 20 जनवरी 2026
उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर हर 100 किलोमीटर की दूरी पर ट्रामा सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि दुर्घटना के बाद घायलों को “गोल्डन आवर” में इलाज मिल सके और अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकें। यह बात परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने कही। वह लोक निर्माण विभाग के विश्वेश्वरैया सभागार में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता और दक्षता विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
परिवहन मंत्री ने कहा कि भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी हैं। हर साल हजारों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा देते हैं और इससे कहीं अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसी होती है, जिनकी जान समय पर इलाज मिलने से बचाई जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के साथ-साथ एक्सप्रेस-वे पर हर 100 किलोमीटर पर एक पूर्ण सुविधायुक्त ट्रामा सेंटर की योजना बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने में देरी ही सबसे बड़ा कारण बनती है, जिससे मौतों की संख्या बढ़ जाती है। यदि हाईवे पर ही ट्रामा सेंटर उपलब्ध होंगे, तो प्राथमिक और आपातकालीन इलाज तुरंत शुरू हो सकेगा।
स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल हों ट्रैफिक नियम
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने सड़क सुरक्षा को लेकर शिक्षा के स्तर से ही जागरूकता विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूली पाठ्यक्रम में ट्रैफिक नियमों को शामिल किया जाना चाहिए और इसके लिए कम से कम पांच अंक निर्धारित किए जाने चाहिए। इससे बच्चों में कम उम्र से ही यातायात नियमों के प्रति समझ और जिम्मेदारी विकसित होगी।
उन्होंने कहा कि बच्चे आज के समय में कल के चालक हैं। यदि उन्हें शुरुआत से ही सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की जानकारी दी जाए, तो भविष्य में दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
टी-प्वाइंट और छोटी सड़कों पर सुरक्षा पर जोर
मंत्री ने सड़क इंजीनियरिंग से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि टी-प्वाइंट और खतरनाक मोड़ों पर ब्रेकर लगाए जाने चाहिए, ताकि वाहनों की गति नियंत्रित रहे। साथ ही छोटी सड़कों पर भी सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाना जरूरी है, क्योंकि अधिकांश हादसे केवल बड़े हाईवे पर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण और संपर्क मार्गों पर भी होते हैं।
उन्होंने लोक निर्माण विभाग और परिवहन विभाग के अधिकारियों से अपील की कि सड़क डिजाइन करते समय केवल वाहनों की रफ्तार नहीं, बल्कि सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए।
ड्राइविंग लाइसेंस की उम्र और प्रशिक्षण पर चिंता
ड्राइविंग लाइसेंस की आयु सीमा पर बात करते हुए परिवहन मंत्री ने कहा कि कई अभिभावक 16 साल के बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति दे देते हैं, जो बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि यह भी विचार किया जाना चाहिए कि यदि किसी कारणवश कम उम्र में वाहन चलाने की अनुमति दी जाती है, तो उन्हें कम से कम बुनियादी ड्राइविंग और ट्रैफिक नियमों का प्रशिक्षण जरूर दिया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना प्रशिक्षण और समझ के वाहन चलाना न केवल चालक के लिए, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है।
जन-जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
दयाशंकर सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में मौतों को कम करने के लिए जन-जागरूकता सबसे प्रभावी और मजबूत हथियार है। यदि लोग ट्रैफिक नियमों को अपनी रोजमर्रा की आदत बना लें, तो सड़क हादसों में होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों से जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि उनकी जान बचाना है। नियमों के पालन के बिना कोई भी कानून सफल नहीं हो सकता। इसलिए यह जरूरी है कि लोग स्वयं जिम्मेदारी समझें और नियमों का पालन करें।
‘नो हेलमेट, नो फ्यूल’ और दो हेलमेट की व्यवस्था
परिवहन मंत्री ने बताया कि सरकार ने दोपहिया वाहन खरीदने के समय डीलर प्वाइंट पर दो हेलमेट देना अनिवार्य किया है। इसके साथ ही ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल’ का नियम भी लागू किया गया है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि जन-जागरूकता की कमी के कारण इसका पूरा लाभ अभी नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि दोपहिया वाहन चलाते समय स्वयं हेलमेट पहनें और पीछे बैठने वाले व्यक्ति को भी हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि हेलमेट केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा के लिए है।
चार पहिया चालकों को भी दी नसीहत
परिवहन मंत्री ने चार पहिया वाहन चालकों से भी यातायात नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें, ओवर स्पीडिंग से बचें और शराब पीकर कभी भी वाहन न चलाएं। ये तीनों बातें सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने कहा कि थोड़ी सी लापरवाही पूरे परिवार की खुशियां छीन सकती है, इसलिए जिम्मेदारी से वाहन चलाना हर नागरिक का कर्तव्य है।
नियमों में ढील नहीं: अधिकारियों को निर्देश
परिवहन मंत्री ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि नियमों के पालन में किसी भी तरह की ढील न दी जाए। ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े सभी नियमों का सख्ती से अनुपालन कराया जाए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि जब तक नियमों का ईमानदारी से पालन नहीं होगा, तब तक सड़क सुरक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।
सरकार कर रही है हर जरूरी इंतजाम
कार्यशाला में मौजूद अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल ने कहा कि सड़क परिवहन सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला माध्यम है और राज्य सरकार सड़क सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम कर रही है। उन्होंने बताया कि परिवहन निगम लंबी दूरी की बसों में दो ड्राइवर की व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिससे ड्राइवर की थकान कम होगी और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सड़कें केवल कारों के लिए नहीं होतीं, बल्कि पैदल चलने वालों, साइकिल सवारों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी सुरक्षित होनी चाहिए।
चार-ई मॉडल से हादसों में कमी
प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग अजय चौहान ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य, परिवहन, लोक निर्माण विभाग और मीडिया के संयुक्त प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने चार-ई मॉडल—एजुकेशन, एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग और इमरजेंसी केयर—के जरिए सड़क हादसों को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि यदि इन चारों पहलुओं पर एक साथ काम किया जाए, तो सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बड़े सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
लगातार कार्रवाई और जागरूकता अभियान
परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा ओवरलोड और ओवर स्पीड वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। सड़क सुरक्षा से जुड़े गीतों और संदेशों का प्रचार जिला प्रशासन के माध्यम से कराया जा रहा है। इसके साथ ही स्कूलों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बच्चों और युवाओं को यातायात नियमों के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके।
कार्यशाला में परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने सड़क सुरक्षा को लेकर सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर सहमति जताई।
