दुनिया के कई देशों के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। उन्होंने गुरुवार को रक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि परमाणु परीक्षण (Nuclear Testing) दोबारा शुरू किए जाएं।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से ट्रंप की शांति योजना (Peace Deal) यूक्रेन मुद्दे पर लगभग बेकार हो चुकी है। अगर अमेरिका सच में ऐसा करता है, तो यह तीन दशक बाद पहली बार होगा जब वॉशिंगटन फिर से न्यूक्लियर टेस्ट करेगा।
ट्रंप ने क्यों लिया यह फैसला
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट पर लिखा कि “दूसरे देशों के टेस्टिंग प्रोग्राम को देखते हुए मैंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को आदेश दिया है कि हमारे परमाणु हथियारों की टेस्टिंग तुरंत शुरू की जाए।”
उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास अभी दुनिया में सबसे ज्यादा न्यूक्लियर हथियार हैं, लेकिन चीन आने वाले पांच सालों में बराबरी पर पहुंच सकता है। इसी वजह से, ट्रंप का मानना है कि अमेरिका को अपनी ताकत फिर से परखनी चाहिए।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रंप प्रशासन ने अब डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस का नाम बदलकर “डिपार्टमेंट ऑफ वॉर” कहना शुरू कर दिया है — जो आने वाले समय में बड़े टकराव की ओर इशारा करता है।
परमाणु परीक्षण क्या है और क्यों रुका था
परमाणु परीक्षण का मतलब है किसी न्यूक्लियर हथियार को असली स्थिति में परखना, ताकि उसकी ताकत और प्रभाव को जाना जा सके।
पहले अमेरिका, रूस और कई देश खुले इलाकों या समुद्र में टेस्ट करते थे, लेकिन इससे रेडिएशन फैलने लगा और हजारों लोग बीमार पड़े। इसी खतरे को देखकर 1963 में Partial Test Ban Treaty और बाद में Comprehensive Nuclear Test Ban Treaty (CTBT) बनाई गई, जिसने परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाई।
अमेरिका ने संधि पर हस्ताक्षर किए, लेकिन मंजूरी नहीं दी
अमेरिका ने 1996 में इस संधि पर हस्ताक्षर तो कर दिए थे, लेकिन सीनेट से इसे मंजूरी (Ratification) नहीं दी। यानी, कानूनी तौर पर अमेरिका इस संधि को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
इसका मतलब यह हुआ कि अगर ट्रंप चाहें, तो अमेरिका किसी भी समय परमाणु परीक्षण शुरू कर सकता है, और कोई देश उसे रोक नहीं सकता।
दूसरी ओर, रूस ने पहले संधि को मंजूरी दी थी, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद उसने अपनी मंजूरी वापस ले ली, जिससे दोनों देशों को अब खुली छूट मिल गई है।
क्या यह दुनिया के लिए खतरे की घंटी है?
इतिहास बताता है कि जब भी किसी एक देश ने परमाणु परीक्षण किया, बाकी देशों ने भी उसकी नकल की।
अमेरिका के पहले परीक्षण के बाद सोवियत संघ, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत और पाकिस्तान ने भी अपने-अपने बम बनाए। अब अगर अमेरिका दोबारा टेस्ट शुरू करता है, तो नई हथियारों की दौड़ (Arms Race) शुरू हो सकती है।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया फिर से परमाणु हथियारों की दौड़ की तरफ बढ़ रही है।
दुनिया फिर से खतरे की ओर?
आज जब बड़े-बड़े समझौते कमजोर हो रहे हैं और देश अपने पुराने वादों से पीछे हट रहे हैं, ट्रंप का यह कदम वैश्विक शांति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
अगर परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू होते हैं, तो यह सिर्फ अमेरिका और रूस के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए चिंता की बात होगी।
