अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव तेज हो गया है। हालिया सैन्य घटनाओं के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम (सीजफायर) अब प्रभावी नहीं रहा। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत की प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है और कतर की मध्यस्थता से आगे वार्ता की संभावना बनी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा विवाद
तनाव का सबसे बड़ा कारण रणनीतिक महत्व वाला होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है। जुलाई की शुरुआत में व्यापारिक जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच एक-दूसरे पर युद्धविराम का उल्लंघन करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
ट्रंप की नई शर्तें, ईरान का सख्त रुख
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भविष्य की किसी भी बातचीत के लिए ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करनी होगी, समुद्री हमले रोकने होंगे और अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर भी स्पष्ट रुख अपनाना होगा। दूसरी ओर, ईरान ने कहा है कि उसने नई बातचीत की कोई मांग नहीं की है और वह अपनी राष्ट्रीय नीतियों से पीछे नहीं हटेगा।
गाजा संकट भी बना चिंता का विषय
इस बीच गाजा में इजरायल और हमास के बीच संघर्ष जारी है। लगातार हो रहे हमलों के कारण मानवीय संकट और गहराता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां नागरिकों तक राहत सामग्री पहुंचाने की अपील कर रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि गाजा का संकट और अमेरिका-ईरान तनाव मिलकर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना रहे हैं।
दुनिया की नजर अगले कदम पर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के बीच होने वाली कूटनीतिक बातचीत यह तय करेगी कि हालात शांत होंगे या टकराव और बढ़ेगा।
