ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के बाद भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल और गैस लेकर आने वाले 30 जहाज सुरक्षित रूप से गुजर चुके हैं। इससे भारत में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। पिछले कुछ महीनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई थी।
तेल और गैस की सप्लाई होगी बेहतर
रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षित रूप से गुजर चुके 30 जहाजों में लगभग आधे एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) लेकर भारत की ओर आ रहे हैं। इसके अलावा 8 जहाज बल्क कार्गो और 7 जहाज कच्चा तेल लेकर रवाना हुए हैं। इससे देश में ऊर्जा आपूर्ति मजबूत होने की संभावना है।
शिपिंग मंत्रालय ने दी जानकारी
शिपिंग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, 1 मार्च से 17 जून के बीच 19 जहाज इस मार्ग से सुरक्षित निकले थे। वहीं, ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम और समझौते के बाद 11 अन्य जहाज भी बिना किसी बाधा के होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इसे क्षेत्र में तनाव कम होने का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
अभी 26 जहाज कर रहे इंतजार
हालांकि, अभी भी 26 जहाज फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इनमें 3 जहाज ऊर्जा संबंधी सामान, 10 जहाज उर्वरक (फर्टिलाइजर) और 13 अन्य प्रकार का माल लेकर खड़े हैं। इन जहाजों के भी सुरक्षित निकलने के बाद भारत को जरूरी सामान की आपूर्ति और बेहतर होने की उम्मीद है।
कीमतों पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल और गैस की नियमित आपूर्ति शुरू होने से बाजार में राहत मिल सकती है। यदि कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य रहती है, तो भविष्य में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। इससे महंगाई के दबाव में कुछ कमी आने की संभावना भी जताई जा रही है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम समुद्री मार्ग
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। इसलिए इस समुद्री रास्ते पर सामान्य आवाजाही बहाल होना देश की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
