पंजाब सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए “स्कूल ऑफ एमिनेंस” परियोजना को तेज़ी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुआई वाली सरकार का दावा है कि इस योजना के जरिए सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, ताकि ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके。
पंजाब सरकार के अनुसार “स्कूल ऑफ एमिनेंस” परियोजना के तहत सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल बोर्ड, कंप्यूटर लैब, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब, विज्ञान प्रयोगशालाएं, रोबोटिक्स लैब, आधुनिक लाइब्रेरी और खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पंजाब सरकार का कहना है कि इन स्कूलों का उद्देश्य केवल बुनियादी शिक्षा देना नहीं, बल्कि छात्रों को भविष्य की तकनीकों और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना भी है。
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने शिक्षा क्षेत्र के लिए 2026-27 के बजट में लगभग ₹19,279 करोड़ का प्रावधान किया है। इसके अलावा “शिक्षा क्रांति” कार्यक्रम के तहत अगले छह वर्षों में करीब ₹3,500 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई गई है। मान सरकार ने स्कूलों के डिजिटलीकरण के लिए लगभग ₹400 करोड़ और स्मार्ट पैनल व इंटरैक्टिव क्लासरूम के लिए करीब ₹98 करोड़ मंजूर किए हैं।
पंजाब सरकार के अनुसार राज्य के 3,600 से अधिक सरकारी स्कूलों में डिजिटल सुविधाएं दी जा रही हैं और 8,230 से ज्यादा इंटरैक्टिव स्मार्ट पैनल लगाए जा रहे हैं। लुधियाना, मोहाली, पटियाला, अमृतसर और मोगा समेत कई जिलों में नए “स्कूल ऑफ एमिनेंस” कैंपस तैयार किए जा रहे हैं। लुधियाना के मिलरगंज स्थित स्कूल में 21 आधुनिक क्लासरूम, रोबोटिक्स लैब और खेल सुविधाओं का निर्माण किया गया है।
हाल ही में पंजाब के एक “स्कूल ऑफ एमिनेंस” में राज्य की पहली “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब” भी शुरू की गई, जहां छात्र आधुनिक एआई आधारित तकनीकों की मदद से पढ़ाई कर रहे हैं। पंजाब सरकार का दावा है कि इस पहल से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को भी वही सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक केवल महंगे निजी स्कूलों में उपलब्ध थीं。
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब अब शिक्षा गुणवत्ता के मामले में कई राज्यों से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में हजारों स्मार्ट क्लासरूम बनाए गए हैं और 13 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती की गई है। साथ ही शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार यह मानती है कि केवल स्मार्ट बोर्ड और आधुनिक इमारतें पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति, पढ़ाई की गुणवत्ता और ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित सुविधाएं सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
“स्कूल ऑफ एमिनेंस” परियोजना को पंजाब में सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के लागू होने से आने वाले वर्षों में पंजाब के सरकारी स्कूल देश के सबसे आधुनिक शिक्षा संस्थानों में शामिल होंगे।
