इस साल अब तक अमेरिका ने 3155 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया है। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक है। 2024 में केवल 1368 भारतीयों को वापस भेजा गया था, जबकि 2023 में यह संख्या 617 थी।
सरकार ने संसद में दी जानकारी
केंद्र सरकार ने इस संबंध में संसद को जानकारी दी है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि 2025 में 21 नवंबर तक कुल 3155 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया। उन्होंने लिखा कि किसी भी व्यक्ति को डिपोर्ट करने से पहले उसकी भारतीय नागरिकता की पूरी जांच की जाती है।
किन कारणों से होते हैं डिपोर्ट
विदेश मंत्रालय के अनुसार अमेरिका आमतौर पर उन लोगों को वापस भेजता है, जो अवैध तरीके से अमेरिका में प्रवेश करते हैं, जिनका वीज़ा समाप्त हो गया है लेकिन वे वहां रहते हैं, बिना दस्तावेज़ों के पकड़े जाते हैं, या जिन पर कोई अपराध का केस दर्ज होता है। आंकड़ों के अनुसार डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
डंकी रूट का रिकॉर्ड नहीं
विदेश राज्य मंत्री ने यह भी बताया कि डंकी रूट (अनौपचारिक तरीके से विदेश जाने वाले लोग) के बारे में अलग रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। ज्यादातर देशों से इस तरह का डेटा साझा नहीं किया जाता है।
अन्य देशों में भारतीय कैदियों की स्थिति
केंद्रीय मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि 31 अक्टूबर 2025 तक कुवैत की जेलों में 316 भारतीय कैदी बंद थे। सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि विदेश में रहने वाले भारतीयों को किसी भी तरह की मुश्किल का सामना न करना पड़े।
विदेश में सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयास
विदेश मंत्रालय ने 2025 में ईक्वाडोर में नया मिशन और अमेरिका तथा रूस में चार नए कॉन्सुलेट खोले हैं। इसका उद्देश्य विदेश में रहने वाले भारतीयों को बेहतर सेवाएं देना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
भारत की विदेश नीति का मकसद
विदेश राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में भारत की मौजूदगी बढ़ाना और मित्र देशों के साथ मिलकर विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाना है। नए मिशन और कॉन्सुलेट खोलने का निर्णय उस देश में भारतीय समुदाय की संख्या, व्यापारिक संभावनाओं और रणनीतिक सहयोग को ध्यान में रखते हुए लिया जाता है।
