भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 715.06 अंक (0.92%) गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 भी 191.45 अंक (0.79%) टूटकर 23,996.25 के स्तर पर बंद हुआ और 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गया।
वैश्विक घटनाओं से बढ़ी निवेशकों की चिंता
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता रही। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिका की ओर से नए टैरिफ संकेतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इन कारणों से निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई और कई सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली।
बैंकिंग और आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
आज के कारोबार में बैंकिंग और आईटी सेक्टर के कई बड़े शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। इन शेयरों में बिकवाली का असर सीधे सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ा। हालांकि ऑटो और कुछ उपभोक्ता कंपनियों के शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली, लेकिन इससे बाजार की कुल गिरावट को रोकना संभव नहीं हो सका।
निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी
बाजार में आई तेज गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। कारोबार समाप्त होने तक शेयर बाजार का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) करीब 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। लगातार तीसरे दिन आई इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन लोगों की जिन्होंने हाल के दिनों में ऊंचे स्तर पर निवेश किया था।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आने वाले कॉर्पोरेट नतीजों पर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होते हैं और विदेशी निवेश में सुधार आता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
