पंजाब ने स्कूली शिक्षा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को पहली से 12वीं कक्षा तक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने का फैसला किया है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस पहल को राज्य की शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव बताते हुए कहा कि इसकी औपचारिक शुरुआत कल से राज्यभर के स्कूलों में होगी।
भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार होंगे छात्र
हरजोत बैंस ने कहा कि आज पूरी दुनिया में AI तेजी से विकसित हो रही तकनीक है और भविष्य में इसका महत्व और बढ़ने वाला है। उन्होंने कहा कि पंजाब के बच्चों को शुरुआती स्तर से ही आधुनिक तकनीक की शिक्षा देकर उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाएगा। उनका कहना था कि जिस पंजाब को कभी अलग पहचान से देखा जाता था, आज वहीं के विद्यार्थी NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।
चीन और दक्षिण कोरिया का दिया उदाहरण
शिक्षा मंत्री ने कहा कि चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने स्कूल स्तर पर AI शिक्षा को प्राथमिकता दी है और पंजाब भी शिक्षा को उसी स्तर तक ले जाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दिल्ली में आयोजित AI समिट का भी उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि पंजाब ने इस क्षेत्र में ठोस पहल की है।
तैयारियों पर 2,500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च
सरकार के अनुसार, स्कूलों में AI शिक्षा शुरू करने की तैयारी के लिए 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है। इसके तहत स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया, आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं और विद्यार्थियों को नई तकनीक से जोड़ने की व्यवस्था की गई।
‘अन्नदाता के साथ भविष्यदाता भी बनेगा पंजाब’
हरजोत बैंस ने कहा कि पंजाब अब केवल देश का अन्नदाता ही नहीं, बल्कि भविष्यदाता भी बनेगा। उनका मानना है कि AI जैसी आधुनिक तकनीक की शिक्षा से राज्य के विद्यार्थियों को नई सोच, बेहतर कौशल और रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे वे भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।
