पंजाब में नशे के खिलाफ चलाया जा रहा ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान 500 दिन पूरे कर चुका है। मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार ने इसे केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित न रखकर इलाज, पुनर्वास और जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश की है। सरकार का दावा है कि इस अभियान ने नशा तस्करों के नेटवर्क पर लगातार दबाव बनाया है और लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।
73 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां, हजारों केस दर्ज
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, अभियान के 500 दिनों में 73,300 से अधिक नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान NDPS Act के तहत 52,432 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गईं। बड़ी मात्रा में हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थ बरामद किए गए, जबकि दो किलोग्राम से अधिक हेरोइन के साथ पकड़े गए 621 बड़े तस्करों पर विशेष कार्रवाई की गई।
847 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कार्रवाई
अभियान का सबसे बड़ा असर नशा तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने की रणनीति में देखने को मिला। सरकार के अनुसार, अब तक 847 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों को जब्त या ध्वस्त किया गया है। इसके साथ ही पंजाब पुलिस ने पिछले चार वर्षों में 6,600 किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद करने का दावा किया है।
इलाज और पुनर्वास पर भी बराबर जोर
सरकार का कहना है कि यह अभियान केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। नशे की लत से जूझ रहे लोगों के इलाज, पुनर्वास और समाज में दोबारा स्थापित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य, पुलिस, शिक्षा, खेल, जेल और सामाजिक सुरक्षा विभाग मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। अभियान का संदेश है—“Protect, Heal and Prevent” यानी सुरक्षा, उपचार और रोकथाम।
जनता की भागीदारी बनी बड़ी ताकत
सरकार का कहना है कि लोगों की सक्रिय भागीदारी से अभियान को मजबूती मिली है। सेफ पंजाब हेल्पलाइन पर हजारों गोपनीय सूचनाएं मिलीं, जिनके आधार पर कई तस्करों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है। इसी कारण जागरूकता अभियान, गांव स्तर की गतिविधियां और जनसहयोग को भी इस मुहिम का अहम हिस्सा बनाया गया है।
