पंजाब विधानसभा में आज का दिन बेहद गरम रहा जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बीबीएमबी (BBMB) और सीआईएसएफ (CISF) के मुद्दे पर धमाकेदार भाषण दिया। उन्होंने न सिर्फ केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए बल्कि पंजाब के हितों को लेकर कड़े तेवर भी दिखाए।
BBMB को बताया “सफेद हाथी”
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) एक “सफेद हाथी” बन चुका है। उन्होंने बताया कि इस बोर्ड का 60 प्रतिशत खर्च पंजाब सरकार उठाती है, लेकिन जब कोई विवाद होता है, तो BBMB पंजाब सरकार के खिलाफ कोर्ट में चली जाती है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर कोई संस्था पंजाब के पैसे से चल रही है और फिर उसी राज्य के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ती है, तो उसका कोई औचित्य नहीं रह जाता।
भगवंत मान ने सुझाव दिया कि अब समय आ गया है कि BBMB को खत्म कर दिया जाए, क्योंकि इसका संचालन अब राज्य के हित में नहीं है।
CISF पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को लेकर भी कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पंजाब के डैमों की सुरक्षा के लिए CISF को रखना जरूरी नहीं है, क्योंकि पंजाब पुलिस इस काम को बखूबी निभा सकती है। उन्होंने बताया कि CISF पर भी काफी खर्च आता है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था पर बोझ बनता जा रहा है।
पठानकोट हमला और केंद्र का रवैया
भगवंत मान ने पठानकोट हमले की घटना का ज़िक्र करते हुए कहा कि उस वक्त केंद्र सरकार ने वहां सेना तैनात की, और बाद में उसका करोड़ों का बिल भी पंजाब सरकार को भेजा गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “सेना में भी तो पंजाब के ही नौजवान हैं, फिर हमें हमारे ही युवाओं को किराए पर क्यों दिया जा रहा है?”
केंद्र को सीधा संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार से साफ शब्दों में पूछा था कि क्या पठानकोट भारत का हिस्सा नहीं है? अगर हम कारगिल जैसे कठिन इलाकों में देश की रक्षा कर सकते हैं, तो क्या नंगल डैम की रक्षा नहीं कर सकते?
उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास खुद के लिए पानी नहीं है, ऐसे में हम दूसरों को पानी कैसे दे सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब के हितों की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता है।
विधानसभा में प्रस्ताव की मांग
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने CISF को पंजाब में एंट्री ना देने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब की सीमाएं, डैम और बाकी महत्वपूर्ण ढांचे पंजाब पुलिस और स्थानीय बलों द्वारा सुरक्षित रखे जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री का यह बयान पंजाब की संप्रभुता, संसाधनों और सुरक्षा को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने न सिर्फ केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए बल्कि यह भी जताया कि पंजाब अब अपने अधिकारों के लिए पीछे नहीं हटेगा। विधानसभा में यह भाषण जहां सत्ता पक्ष के लिए गर्व का विषय बना, वहीं विपक्षी दलों के लिए भी एक नई बहस की शुरुआत कर गया।
