पंजाब सरकार का बड़ा कदम: ‘जीवनजोत प्रोजेक्ट-2’ शुरू, 367 बच्चों को दी गई नई ज़िंदगी
पंजाब सरकार ने सड़क पर भीख मांगते बच्चों को बचाने के लिए एक बेहद मानवीय और अहम पहल की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार ने ‘जीवनजोत प्रोजेक्ट-2’ के तहत प्रदेशभर में एक विशेष अभियान चलाया है। इस मुहिम का उद्देश्य बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराकर उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की ओर ले जाना है।
सिर्फ दो दिनों के भीतर, 18 जगहों पर छापेमारी कर 41 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। लेकिन बठिंडा में पकड़े गए कुछ मामलों ने अधिकारियों को संदेह में डाल दिया है, क्योंकि आशंका है कि ये बच्चे उनके असली माता-पिता के साथ नहीं थे। ऐसे में अब इन बच्चों का डीएनए टेस्ट करवाया जाएगा ताकि यह पुष्टि हो सके कि वे सही परिवार के साथ थे या नहीं। जब तक डीएनए रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक बच्चों को बाल सुधार गृह में रखा जाएगा।
डॉ. बलजीत कौर, जो इस मिशन की निगरानी कर रही हैं, ने जानकारी दी कि यदि कोई माता-पिता अपने बच्चों से जबरन भीख मंगवाते हैं, तो पहले उन्हें समझाया जाएगा। यदि वे नहीं मानते, तो उन्हें अयोग्य संरक्षक घोषित किया जाएगा और उनके बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इस काम में शामिल किसी भी गिरोह या रैकेट को 5 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
पिछले 9 महीनों में, इस अभियान के तहत 367 बच्चों को भीख मांगने की स्थिति से बाहर निकाला गया है। इनमें से 350 बच्चों को उनके परिवारों के पास वापस भेजा गया, जबकि 17 बच्चे ऐसे मिले, जिनके परिजनों की पहचान अब तक नहीं हो सकी। उन्हें फिलहाल बाल देखभाल संस्थाओं में रखा गया है।
अभियान के दौरान 753 जगहों पर छापेमारी की गई। हालांकि कई बार पुलिस टीमें जब मौके पर पहुंची, तो बच्चे और उनसे भीख मंगवाने वाले लोग फरार हो गए, जिससे कई बार सफलता नहीं मिल पाई।
इनमें से 183 बच्चों को स्कूलों में दाखिल करवाया गया। 6 साल से कम उम्र के 13 बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों में भेजा गया। इसके अलावा 30 बच्चों को ₹4000 प्रति माह की स्पॉन्सरशिप स्कीम में जोड़ा गया है, ताकि वे नियमित पढ़ाई कर सकें। 16 बच्चों को ₹1500 की मासिक पेंशन भी दी जा रही है। इन सभी मामलों की निगरानी हर तीन महीने में डीसीपीओ द्वारा की जा रही है।
पंजाब सरकार की यह मुहिम न केवल बच्चों को सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि समाज को भी बाल शोषण और तस्करी जैसे गंभीर अपराधों के प्रति जागरूक कर रही है।
