मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में पंजाब कैबिनेट ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और दूरदर्शी फैसला लिया है। कैबिनेट ने पंजाब डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी पॉलिसी को मंज़ूरी देते हुए राज्य में डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित करने का रास्ता साफ कर दिया है। इस पॉलिसी के तहत प्राइवेट हिस्सेदारी को भी अनुमति दी गई है, जिससे आधुनिक तकनीक और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
देश में पहली बार राज्य स्तर की डिजिटल यूनिवर्सिटी
इस फैसले के साथ ही पंजाब देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने राज्य की आधिकारिक पॉलिसी के ज़रिये डिजिटल यूनिवर्सिटी को शुरू करने का कदम उठाया है। सरकार का मानना है कि बदलते समय में पढ़ाई के तरीके भी बदल रहे हैं और डिजिटल माध्यम से शिक्षा को हर व्यक्ति तक पहुंचाना ज़रूरी हो गया है।
ऑनलाइन और ओपन लर्निंग से पढ़ाई होगी आसान
नई डिजिटल यूनिवर्सिटी में छात्रों को ऑनलाइन और ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) मोड के ज़रिये डिग्री दी जाएंगी। इसका सीधा फायदा उन युवाओं, कामकाजी लोगों और ग्रामीण इलाकों के छात्रों को मिलेगा, जो किसी कारणवश नियमित कॉलेज नहीं जा पाते। अब पढ़ाई के लिए फिजिकल कैंपस तक सीमित रहना ज़रूरी नहीं होगा।
नौकरीपेशा और वंचित वर्ग को मिलेगा अवसर
सरकार का कहना है कि यह पहल खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी, जो नौकरी के साथ पढ़ाई करना चाहते हैं या जिनकी पढ़ाई किसी वजह से बीच में छूट गई थी। डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिये उन्हें नए स्किल्स सीखने और डिग्री हासिल करने का मौका मिलेगा।
शिक्षा को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम
पंजाब कैबिनेट का यह फैसला राज्य में शिक्षा सुधारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। डिजिटल यूनिवर्सिटी के ज़रिये शिक्षा को अधिक सुलभ, लचीला और आधुनिक बनाया जाएगा, जिससे आने वाले समय में पंजाब के युवाओं को नई उड़ान मिल सकेगी।
