पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने खुलासा किया है कि राज्य में आने वाली 80 प्रतिशत से अधिक फिरौती की कॉलें वास्तव में स्थानीय अपराधियों द्वारा की जा रही हैं, जो खुद को “गैंगस्टर” बताकर लोगों से पैसे वसूलने की कोशिश करते हैं। डीजीपी ने बताया कि पुलिस के पास इस संबंध में पुख्ता जानकारियाँ मौजूद हैं।
हर कॉल पर एफआईआर जरूरी
गौरव यादव ने सभी पुलिस कमिश्नरों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) को निर्देश दिया है कि किसी भी फिरौती कॉल को हल्के में न लिया जाए। उन्होंने कहा कि हर ऐसी कॉल को एफआईआर के रूप में दर्ज किया जाए और उसकी गहराई से जांच हो। डीजीपी ने साफ कहा, “आम नागरिक हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं, उनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।”
‘युद्ध नशों के खिलाफ’ बनी बड़ी सफलता
पत्रकारों से बातचीत के दौरान डीजीपी यादव ने राज्य सरकार की मुहिम ‘युद्ध नशों के खिलाफ’ को बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि अब तक पंजाब पुलिस ने 1300 किलोग्राम से ज्यादा हेरोइन बरामद की है। इसके अलावा ‘सुरक्षित पंजाब’ हेल्पलाइन के ज़रिए जनता से 16,000 से अधिक महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिली हैं, जिनकी मदद से कई बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।
हवाला नेटवर्क पर भी बड़ी कार्रवाई
डीजीपी ने बताया कि पुलिस ने नशे के कारोबार से जुड़े हवाला चैनलों पर भी बड़ा प्रहार किया है। इस दौरान 64 हवाला संचालकों को गिरफ्तार किया गया और करीब 14 करोड़ रुपये की अवैध नकदी ज़ब्त की गई। यह कार्रवाई नशे के पैसों के प्रवाह को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विदेशी तत्वों की साजिश पर कड़ी नजर
गौरव यादव ने कहा कि पाकिस्तान में बैठे आईएसआई और कुछ कट्टरपंथी संगठन पंजाब की शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पंजाब पुलिस पूरी तरह चौकन्नी है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है।
शहीद परिवारों से मुलाकात
कार्यक्रम के बाद डीजीपी गौरव यादव ने शहीद पुलिस कर्मियों के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि पंजाब सरकार और पुलिस विभाग हर संभव सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि शहीद जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और पंजाब पुलिस उनकी विरासत को हमेशा सम्मान देगी।
