पंजाब में भारी बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आए पानी के चलते सतलुज नदी उफान पर है। गिदड़पिंडी पुल पर जलस्तर 706.80 फीट तक पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान 705.60 फीट पर है। नदी का पानी रेल की पटरियों तक छूने लगा, जिसके चलते रेलवे ने एहतियातन कई ट्रेनों की आवाजाही रोक दी है।
रेल यातायात पर असर
हालात बिगड़ने पर रेलवे ने जालंधर से लोहियां तक की ट्रेनों को तो चलने दिया, लेकिन लंबी दूरी की ट्रेनों का मार्ग बदल दिया गया। धानबाद एक्सप्रेस समेत कई गाड़ियों को लुधियाना से फिरोजपुर होते हुए मोगा मार्ग पर निकाला जा रहा है। वहीं, फिरोजपुर से आने वाली गाड़ियों को मखू स्टेशन से ही वापस लौटा दिया गया।
चिट्टी बेईं ने बढ़ाई मुश्किलें
सिर्फ सतलुज ही नहीं, बल्कि चिट्टी बेईं भी पूरी तरह उफान पर है। नहर का पानी ओवरफ्लो होकर खेतों में घुस गया है, जिससे खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। लोहियां शहर और आसपास के गांवों में पानी भरने से लोगों में भय का माहौल है।
सिद्धूपुर रोड और मंड क्षेत्र पर खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार, चिट्टी बेईं का पानी सिद्धूपुर रोड से होते हुए लोहियां शहर की ओर बढ़ रहा है। वहीं मंड क्षेत्र में भी इसका पानी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी का बहाव इसी तरह तेज रहा तो कई गांव पूरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
हरिके हेडवर्क्स तक तेज़ी से बह रहा पानी
सकारात्मक पहलू यह है कि सतलुज का पानी बड़ी तेज़ी से हरिके हेडवर्क्स की ओर बढ़ रहा है। इस कारण फिलहाल डैम पर दबाव ज्यादा नहीं है और बड़े पैमाने पर बाढ़ आने का खतरा कुछ हद तक टला हुआ है।
लोगों में डर और जिज्ञासा दोनों
गिदड़पिंडी पुल पर बाढ़ जैसे हालात देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। यहां मेले जैसा माहौल बना हुआ है। लोग नदी के उफान को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी और नहर के किनारे जाने से बचें।
फसलों को भारी नुकसान, किसानों की चिंता बढ़ी
चिट्टी बेईं से ओवरफ्लो हुआ पानी सीधे खेतों में भरने से धान और अन्य फसलों को काफी नुकसान हुआ है। किसान चिंतित हैं कि अगर बारिश इसी तरह जारी रही तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।
