ईरान में चल रहे युद्ध और अमेरिका-इज़राइल के हमलों का असर वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है। खाड़ी देशों में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और कई बंदरगाहों पर दबाव बढ़ गया है। भारत बड़ी मात्रा में चीनी का निर्यात ईरान, यूएई जैसे देशों को करता है। लेकिन मौजूदा हालात के कारण निर्यात धीमा पड़ सकता है। इसका मतलब है कि ज्यादा चीनी देश के अंदर ही रहेगी, जिससे घरेलू बाजार में उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
इस साल उत्पादन में बढ़ोतरी
भारत में चीनी का सीजन अक्टूबर से सितंबर तक चलता है। 2025-26 सीजन में फरवरी के अंत तक करीब 24.75 मिलियन टन (247.5 लाख टन) चीनी का उत्पादन हो चुका है। पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 22.02 मिलियन टन था। यानी इस बार उत्पादन लगभग 12 प्रतिशत ज्यादा है। पूरे साल के लिए अनुमान है कि 29-30 मिलियन टन तक उत्पादन हो सकता है। हालांकि, कुछ चीनी एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होती है, जिससे बाजार में उपलब्ध मात्रा थोड़ी कम हो जाती है।
मिलों में पर्याप्त स्टॉक
28 फरवरी 2026 तक चीनी मिलों के पास लगभग 12.05 मिलियन टन का स्टॉक मौजूद था। इसमें करीब 4.7 मिलियन टन पिछले साल की बची हुई चीनी भी शामिल है। मार्च से सितंबर तक कुल 16-17 मिलियन टन चीनी उपलब्ध रहने का अनुमान है। पिछले साल इसी अवधि में करीब 16.1 मिलियन टन चीनी बाजार में आई थी। इसका मतलब है कि स्थिति संतुलित है, हालांकि बहुत ज्यादा अतिरिक्त स्टॉक नहीं है।
निर्यात पर असर
सरकार ने इस सीजन में 2 मिलियन टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण केवल 0.5 मिलियन टन ही निर्यात हो पाएगी। इससे करीब 1.5 मिलियन टन चीनी देश में ही रह जाएगी। यह घरेलू बाजार के लिए राहत की बात है, क्योंकि आपूर्ति बेहतर रहेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
प्रमुख उत्पादन राज्य
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य हैं। फरवरी तक महाराष्ट्र में 9.53 मिलियन टन, उत्तर प्रदेश में 7.48 मिलियन टन और कर्नाटक में 4.45 मिलियन टन उत्पादन दर्ज किया गया है। इन राज्यों में इस बार उत्पादन में बढ़ोतरी देखी गई है।
आम लोगों को क्या फायदा?
अगर निर्यात कम होता है तो देश में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे कीमतों में तेज बढ़ोतरी की संभावना कम हो जाती है। फिलहाल आयात की जरूरत नहीं दिख रही है और बाजार संतुलित नजर आ रहा है।
